बेखौफ.....

sketch by : Meghna Pujari

उस समय, रात के ११ बजे मैं अकेले बस में जा रही थी, मन में एक अजीब सा डर था, जी घबरा रहा था, ऐसे लग रहा था कि कब ये लंबा सफर कटेगा और में सही सलामत अपने घर पहुंच जाऊ। बस में सिर्फ मैं, एक बूढ़ी दादी, २-३ शराब पी रखे आदमी और एक युवक(जो अपने लैपटॉप पर काम में खोया था) कंडक्टर और ड्राइवर थे। अचानक से पीछे बैठे हुए लड़के अपने जगह से उठ कर मेरे पीछे वाले सीट पर आ बैठे और अपने अपने में पर इतने जोर से कि ड्राइवर तक को सुनाई दे ऐसी आवाज में बात कर रहे थे, कह रहे थे "आजकल की लड़कियां बड़ी ही सख्त होती है, समजता कैसे नहीं इनको की अच्छे घर की लड़कियां रात को अकेले नहीं जाती" और सारे जोर से हस पड़े। फिर थोड़ी देर बाद बूढ़ी दादी अपने स्थानक आने पर उतर गई, पर उतरने से पहले मेरी ओर देख के मुस्कुराई जैसे मुझे अकेले जाने के लिए हिम्मत दे रही हो। 

वापस से उनमें से एक नशेड़ीने मेरे कान के पास आके कहा, "अच्छी घरकी लड़कियां ऐसे अकेले नहीं घूमती हैं, और तुम्हारे कपड़ों से तुम वैसे भी बुलाने वाली लगती हो, बताओ तो क्या दाम हैं?" में एक पल के लिए बहुत डर गई, फिर उठ कर दूसरे जगह जा बैठी। उन लोगों का हसना जारी था, मुझे अब और डर लगने लगा था, कुछ समझ नहीं आ रहा था, किसी को फोन करने का भी जरिया नहीं था क्यूंकि फोन बंद हो गया था। अचानक से उनमें से एक मेरी और बढ़ा और उसने कहा,"तुमने दाम बताया नहीं" उसके हात को अपने कंधे पर से हटा कर मैने उसे जोर का तमाचा मारा, ये देख उनको गुस्सा आया और वे और बदतमीजी करने लग गए। ड्राइवर , कंडक्टर और वो लड़का जैसे बेबस, लाचार थे ऐसे देखे जा रहे थे। २ मिनट तक वैसे ही मेरी उनसे हातापाई जारी थी, कराटे आने के बावजूद मेरी ताकत उनसे कम थी, तब मुझे लगा अब मुझसे इनको संभालना नहीं हो पा रहा। मैं मदत के लिए चिल्लाती रही, पर बाकी सब जैसे मोम के पुतलों जैसे खड़े थे, ना कोई बढ़ा, ना किसीने उनको रोका (बस मेने कंडक्टर और उस युवक के बीच कुछ आंखों का इशारा होते हुए देखा)। उनमें से एक जोर का हस कर बोला, " ये भी तो आखिर मर्द ही हैं.....!" फिर अचानक से उस युवक ने अपना फोन निकालते हुए बोला,"अरे भैया रुके क्यूं हो, अच्छे से दबोचो उसको फिर बारी बारी सब मज़ा लेंगे, में थोड़ा इस पल को यादगार बनाने के लिए वीडियो ले लेता हूं" और वे सब हसने लगे। उसके वो शब्द सुनकर मुझे अपने आप से लड़की होने पर घिन आने लगी! फिर अचानक से उस युवक ने एक फोन लगाया और जोर से बोला (commisoner) भैया तुम्हारे लिए एक तोफा भेजा हैं अब तुम्हे इसके साथ को करना है वो करो। वे सुनकर वो आदमी हक्केबक्के रह गए, उनको पता ही नहीं चला कि क्या और कैसे हुआ। वे सब उस युवक के ओर उसको मारने बढ़े तभी अचानक में पीछे से पुलिस की गाड़ियों का भोपु सुनाई दिया। 

कामिशनर ने उस भले युवक का हात मिलाते हुए उसको शाबाशी दी और कहा आप तीनों के होशियारी से (युवक, कंडक्टर, ड्राइवर) आज इस लड़की को बिना कुछ हुए हमने इनको पकड़ा है। फिर वो युवक पुलिस वालों के साथ जब मुझे घर छोड़ने आया तब हमारी बातचीत से मुझे ये पता चला कि जब वह लडके मुझे अपना दाम पूछ रहे थे तभी इसने अपने कमिशनर दोस्त को एसएमएस कर दिया था, और जब बाद में वे मुझपर हमला किए तब इसने कंडक्टर और ड्राइवर की मदत से परिस्थिति संभाल ली, और सबूत के तौर पर वीडियो बनाया। उन तीनों के धैर्य से में और मेरी आबरू दोनों बचे रहे। उस युवक से सवाल पूछने पर उसने मुझसे कहा कि, "मेरी भी आप जैसे ही एक छोटी बहन है, जितना में उसे सुरक्षित देखना चाहता हूं उतना ही हर एक स्त्री को भी अपने घर सही सालामत वापस जाते हुए देखना चाहता हूं, यही एक सच्चे मर्द का फ़र्ज़ है, कि जरूरत के समय हर एक ही मदत करना फिर चाहे वो गरीब भूखा, बच्चा या फिर कोई लड़की को!"


हम लड़कियों कि आजादी कुछ उन दरिंदो के वजह से कैद है, पर आज ये कहते हुए गर्व हो रहा की सारे मर्द एक जैसे नहीं होते है, कुछ होते है जो बिना आवाज किए मेरी रक्षा करते है, मेरे लिए मेरे साथ खड़े होते है। मुझे बेबस, लाचार नहीं समझते। ज़िंदगी में और जिंदगी से बस अब एक ही दुआ हैं की चलना है मुझे इन रास्तों पर बेखौफ, बिना किसी के सहारे। नहीं चाहिए किसिका सहारा रात को अकेले चलने के लिए, जब सुबह भी अंधेरे से भरी हो। चलना है, चलते रहना है।

sketch by : Vinita Shinde.

Thank you Pranay for proof reading!!!

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