निगाहें!
Note: Hello readers, I have tried something new this time, it may have mistakes. Suggestions are welcome. Hope you will like it!
कब से बस यही आंस ले बैठी हैं ये निगाहें की आओगे जरूर तुम एक दिन.
अब आखिर आ ही जाओ कब तब लगाये बैठे आंस तुम्हारी.
अब आखिर आ भी जाओ, थक गयी है ये करते इंतेझार तुम्हारा.
अब आखिर आ ही जाओ तुम, बन जाओ इनका सहारा.
अब आखिर आ ही जाओ तुम बनके इनका सितारा
बढाओ जूनून हमारे इश्क का.
अब आखिर आ ही जाओ तुम, मान ली हर बात तुम्हारी.
अब आखिर आ ही जाओ मरहम बनके, पता है तुम भी हो दर्द मे, मैं भी जो हूं.
अब आखिर आ ही जाओ तुम, आता हैं जैसे वो आफ़ताब; उजाल दो ये जिंदगानि तुम्हारी रोशनी से जुग्नु की तरह.
अब आखिर आ ही जाओ, खिला दो ये जिंदगानी केह के प्यार के दो अल्फाज.
अब आखिर आ भी जाओ, थक गई है करते इंतजार तुम्हारा, थम सी गई है ज़िंदगी ये इंतजार में तुम्हारे, आकर थोड़ी जान भर प्यारे.
अब आखिर आ ही जाओ, गुम सी गयी हूं धुंडते तुम्हे, मिलकर रास्ता तो दिखावो फिर चलेंगे कदम साथ तेरे.
अब आखिर आ ही जाओ नही बरदाष्त होती हैं ये दूरी तुमसे, थाम लो ये हात ओर ले चलो कही दूर.
Thank you Pranay for editing and reviewing
Amazing💕😍
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ReplyDeleteThank you 💝
Delete😍❤️❤️❤️
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